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Insight बंदे में है दम

सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग

आपने MBA चायवाले के बारे में सुना होगा, आपने ग्रेजुएट चायवाली की कहानी सुनी होगी, आज इंडिया स्टोरी प्रोजेक्ट आपको मॉडल चायवाली की कहानी सुनाएगा। ये कहानी मुश्किल हालातों से लड़ने की सीख देती है। ये कहानी बताती है कि हमें दुनिया की परवाह किये बगैर आगे बढ़ते जाना है। ये कहानी हमें ये भी बताती है कि दुनिया में कोई काम छोटा नहीं होता।

चाय से नई शुरुआत

मॉडल चायवाली की दुकान। गोरखपुर में दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के लक्ष्मी बाई महिला छात्रावास के पास ये चाय की दुकान रोज़ सुबह साढ़े सात बजे खुल जाती है। चाय पीने वाले दुकान खुलने से पहले से ही इंतज़ार में रहते हैं। चाय की ये दुकान है सिमरन गुप्ता की। रोज़ सुबह से शाम तक सिमरन दुकान में रहती हैं। चाय बनाती हैं और लोगों को पिलाती हैं। चाय की ये दुकान महज़ 2 महीने पहले खुली है और इसके क़द्रदानों की संख्या बढ़ती जा रही है।

आम तौर पर चाय की दुकान पुरुष ही चलाया करते हैं। महिलाएं होती भी हैं तो वो पुरुषों का साथ देने के लिए लेकिन गोरखपुर की ये मॉडल चायवाली की चाय की दुकान अपने आप में ख़ास है।

मॉडलिंग से चाय की दुकान तक

गोरखपुर की ये चाय की दुकान कई मायनों में ख़ास है। सबसे बड़ी ख़ासियत है ‘मॉडल चायवाली’ का नाम। जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि इस चाय की दुकान को चलाने वाली सिमरन एक मॉडल हैं। दुकान के बाहर उनके नाम का पोस्टर भी लगा है। सिमरन की पढ़ाई-लिखाई गोरखपुर से ही हुई। पढ़ाई के दौरान ही उनका मॉडलिंग का शौक जागा और वो इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने लगीं। इसमें बड़ी कामयाबी उन्हें साल 2018 में मिली जब उन्होंने मिस गोरखपुर का टाइटल जीत कर धमाल मचा दिया। इसके बाद वो सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं। मॉडलिंग के कई ऑफ़र मिलने लगे। मौक़ा मिला तो सिमरन गोरखपुर से दिल्ली आ गईं। काम मिलने लगे तो नाम भी होने लगा। ऐसा लगने लगा कि सिमरन मॉडलिंग में बड़ी शख़्सियत बन जाएंगी।

कोरोना काल ने लगाया ग्रहण

सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन फ़िर आया कोरोना का काला काल। वो समय जब पूरी दुनिया में बर्बादी छा गई। इसी दौर में सिमरन का काम भी प्रभावित हो गया। मॉडलिंग बंद हो गई। काम बिल्कुल ना के बराबर हो गया। ऐसे में सिमरन को दिल्ली से गोरखपुर लौटना पड़ा। गोरखपुर लौटकर सिमरन बैठी नहीं रहीं। उनके सामने ना सिर्फ़ घर चलाने का संकट ही नहीं था, अपनी पहचान बनाए रखने की चुनौती भी थी। इसी बीच उनको बिजली विभाग में संविदा पर नौकरी मिल गई। सिमरन को लगा अब ज़िंदगी फ़िर से पटरी पर आ जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। संविदाकर्मियों की कम तनख़्वाह और वो भी कई-कई महीनों बाद, ऐसे में सिमरन के सामने नया संकट आ खड़ा हुआ।

चाय की दुकान खोलने का फ़ैसला

बिजली विभाग की संविदा नौकरी से परेशान होकर सिमरन ने चाय की दुकान खोलने का फ़ैसला किया। जगह चुनी लक्ष्मी बाई महिला छात्रावास के पास और नाम दिया मॉडल चायवाली। सिमरन ने अपना एक स्लोगन भी बनाया है- ‘सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग’।

सिमरन का मानना है कि लोग क्या सोचेंगे और क्या कहेंगे, ये सोच-सोच कर हम अच्छे कामों से भी पैर पीछे खींच लेते हैं। ज़रूरत इस बात की है कि हम पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने पसंद के काम में जुट जाएं बगैर इस बात की परवाह किये कि लोग क्या कहेंगे।

सिमरन की इस सोच का असर भी हुआ। आज पूरे गोरखपुर में सिमरन की चाय की दुकान चर्चित हो चुकी है। ना केवल उनके मॉडल होने की वजह से बल्कि अच्छी ज़ायकेदार चाय की वजह से। सिमरन इस बात का पूरा ख़्याल रखती हैं कि उनकी चाय लोगों को पसंद आए।

चाय के साथ मॉडलिंग भी

सिमरन को अपनी चाय की दुकान से सम्मानजनक पैसे मिल जा रहे हैं। पिता राजेंद्र गुप्ता के साथ वो इस दुकान को चला रही हैं। इसके साथ-साथ वो मॉडलिंग भी कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर उन्हें कई काम भी मिल रहे हैं। उम्मीद है सिमरन का ये संघर्ष उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

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